कितनी शर्मनाक बात है कि आज के इस तकनीकी युग में भी चिकित्सा उद्योग में नवाचार की कमी है! क्या हम वास्तव में इस हालत में हैं कि हमें एक फ्रांसीसी कंपनी, Kicmed, की ओर देखना पड़ रहा है ताकि वो 3D प्रिंटिंग के माध्यम से क्रायोथेरेपी के लिए एक 'इनवेटिव सॉल्यूशन' विकसित कर सके? यह तो एक स्पष्ट संकेत है कि हमारी स्वास्थ्य प्रणाली कितनी जर्जर हो चुकी है!
कितना मजाक है कि एक कंपनी को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि कैसे यह तकनीक मरीजों की देखभाल में सुधार कर सकती है, जबकि हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्रालय और बड़े अस्पतालों के प्रशासन अपने पुराने तरीके पर अड़े हुए हैं। क्या यह सही है कि सभी जगह केवल तंत्रिका बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने के बजाय, मरीजों की वास्तविक समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है? Kicmed के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि क्यों हमें उनके जैसे छोटे नवाचारों की आवश्यकता है?
क्या हम सच में इस पर चर्चा कर सकते हैं कि चिकित्सा प्रौद्योगिकी में सुधार की बजाय, हम क्यों नई तकनीकों को अपनाने से कतराते हैं? क्या हम यह नहीं देख सकते कि कैसे 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकें मरीजों की जीवनशैली में सुधार कर सकती हैं? क्या हमें वास्तव में Kicmed जैसे बाहर के व्यवसायों पर निर्भर रहना चाहिए? यह एक गंभीर सवाल है कि क्या हमारे अपने वैज्ञानिक और तकनीकी समुदाय इस दिशा में कदम उठाने की हिम्मत जुटा पाएंगे।
और दूसरी बात, क्या यह सही नहीं है कि हमें अपने स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए बेहतर उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए? Kicmed की क्रायोथेरेपी सॉल्यूशन सिर्फ एक शुरुआत है, लेकिन हमें इसे एक क्रांति की तरह लेना चाहिए। हम क्यों किसी कंपनी पर निर्भर रहें जब हमें अपने ही देश में नवाचार करना चाहिए? हमें चाहिए कि हम अपनी स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव लाएं, और इसके लिए हमें एकजुट होना होगा।
आखिरकार, यह हमारी स्वास्थ्य और जीवन की बात है। क्या हम इसे हल्के में ले सकते हैं? नहीं, बिल्कुल नहीं! यह समय है कि हम सभी एकजुट होकर इस मुद्दे पर जोरदार आवाज उठाएं और चिकित्सा उद्योग में आवश्यक सुधारों के लिए लड़ें।
#Kicmed #क्रायोथेरेपी #3Dप्रिंटिंग #चिकित्सा #स्वास्थ्यउद्योग
कितना मजाक है कि एक कंपनी को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि कैसे यह तकनीक मरीजों की देखभाल में सुधार कर सकती है, जबकि हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्रालय और बड़े अस्पतालों के प्रशासन अपने पुराने तरीके पर अड़े हुए हैं। क्या यह सही है कि सभी जगह केवल तंत्रिका बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने के बजाय, मरीजों की वास्तविक समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है? Kicmed के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि क्यों हमें उनके जैसे छोटे नवाचारों की आवश्यकता है?
क्या हम सच में इस पर चर्चा कर सकते हैं कि चिकित्सा प्रौद्योगिकी में सुधार की बजाय, हम क्यों नई तकनीकों को अपनाने से कतराते हैं? क्या हम यह नहीं देख सकते कि कैसे 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकें मरीजों की जीवनशैली में सुधार कर सकती हैं? क्या हमें वास्तव में Kicmed जैसे बाहर के व्यवसायों पर निर्भर रहना चाहिए? यह एक गंभीर सवाल है कि क्या हमारे अपने वैज्ञानिक और तकनीकी समुदाय इस दिशा में कदम उठाने की हिम्मत जुटा पाएंगे।
और दूसरी बात, क्या यह सही नहीं है कि हमें अपने स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए बेहतर उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए? Kicmed की क्रायोथेरेपी सॉल्यूशन सिर्फ एक शुरुआत है, लेकिन हमें इसे एक क्रांति की तरह लेना चाहिए। हम क्यों किसी कंपनी पर निर्भर रहें जब हमें अपने ही देश में नवाचार करना चाहिए? हमें चाहिए कि हम अपनी स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव लाएं, और इसके लिए हमें एकजुट होना होगा।
आखिरकार, यह हमारी स्वास्थ्य और जीवन की बात है। क्या हम इसे हल्के में ले सकते हैं? नहीं, बिल्कुल नहीं! यह समय है कि हम सभी एकजुट होकर इस मुद्दे पर जोरदार आवाज उठाएं और चिकित्सा उद्योग में आवश्यक सुधारों के लिए लड़ें।
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कितनी शर्मनाक बात है कि आज के इस तकनीकी युग में भी चिकित्सा उद्योग में नवाचार की कमी है! क्या हम वास्तव में इस हालत में हैं कि हमें एक फ्रांसीसी कंपनी, Kicmed, की ओर देखना पड़ रहा है ताकि वो 3D प्रिंटिंग के माध्यम से क्रायोथेरेपी के लिए एक 'इनवेटिव सॉल्यूशन' विकसित कर सके? यह तो एक स्पष्ट संकेत है कि हमारी स्वास्थ्य प्रणाली कितनी जर्जर हो चुकी है!
कितना मजाक है कि एक कंपनी को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि कैसे यह तकनीक मरीजों की देखभाल में सुधार कर सकती है, जबकि हमारे देश के स्वास्थ्य मंत्रालय और बड़े अस्पतालों के प्रशासन अपने पुराने तरीके पर अड़े हुए हैं। क्या यह सही है कि सभी जगह केवल तंत्रिका बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने के बजाय, मरीजों की वास्तविक समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है? Kicmed के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए, लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि क्यों हमें उनके जैसे छोटे नवाचारों की आवश्यकता है?
क्या हम सच में इस पर चर्चा कर सकते हैं कि चिकित्सा प्रौद्योगिकी में सुधार की बजाय, हम क्यों नई तकनीकों को अपनाने से कतराते हैं? क्या हम यह नहीं देख सकते कि कैसे 3D प्रिंटिंग जैसी तकनीकें मरीजों की जीवनशैली में सुधार कर सकती हैं? क्या हमें वास्तव में Kicmed जैसे बाहर के व्यवसायों पर निर्भर रहना चाहिए? यह एक गंभीर सवाल है कि क्या हमारे अपने वैज्ञानिक और तकनीकी समुदाय इस दिशा में कदम उठाने की हिम्मत जुटा पाएंगे।
और दूसरी बात, क्या यह सही नहीं है कि हमें अपने स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए बेहतर उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए? Kicmed की क्रायोथेरेपी सॉल्यूशन सिर्फ एक शुरुआत है, लेकिन हमें इसे एक क्रांति की तरह लेना चाहिए। हम क्यों किसी कंपनी पर निर्भर रहें जब हमें अपने ही देश में नवाचार करना चाहिए? हमें चाहिए कि हम अपनी स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव लाएं, और इसके लिए हमें एकजुट होना होगा।
आखिरकार, यह हमारी स्वास्थ्य और जीवन की बात है। क्या हम इसे हल्के में ले सकते हैं? नहीं, बिल्कुल नहीं! यह समय है कि हम सभी एकजुट होकर इस मुद्दे पर जोरदार आवाज उठाएं और चिकित्सा उद्योग में आवश्यक सुधारों के लिए लड़ें।
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