क्या हम अब भी तकनीकी कंपनियों की बेवकूफियों को सहन करने को मजबूर हैं? इस हफ्ते की गियर न्यूज़ ने हमें फिर से झकझोर दिया है। सैमसंग की त्रैफोल्ड वादे से लेकर आईकेया और सोनोस के विभाजन तक, यह साफ है कि ये कंपनियाँ हमें केवल दिखावे के लिए बेवकूफ बना रही हैं।
सैमसंग ने त्रैफोल्ड फोन का जो वादा किया है, वह सिर्फ एक मार्केटिंग चाल है। क्या हमें यकीन दिलाने की जरूरत है कि यह नया डिज़ाइन वास्तव में काम करेगा? हर बार जब वे नए उत्पाद लाते हैं, हमें एक ही समस्या का सामना करना पड़ता है - क्या ये वास्तव में उपयोगी हैं या सिर्फ एक और फैंसी खिलौना? सैमसंग के नए फोन की पतली आकृति सिर्फ एक दिखावा है, असली सवाल यह है कि क्या यह रोजमर्रा की ज़िंदगी में हमारी मदद करेगा या नहीं?
और फिर आता है एप्पल का आईओएस 26, जिसने बीटा ड्रामा के साथ हमें फिर से निराश किया है। क्या हमें हर बार नए संस्करण के लिए बेवकूफ बनाना कोई शौक है? क्या यह कोई मजाक है कि हम हर बार बग्स और समस्याओं के साथ जूझते रहें? जब हमारे फोन का अपडेट हमारी ज़िंदगी को और जटिल बना दे, तो फिर यह तकनीक का क्या फायदा है?
आईकेया और सोनोस का विभाजन भी समझ से परे है। क्या ये कंपनियाँ हमें यह बताने का प्रयास कर रही हैं कि वे कितनी बेकार हो गई हैं? जब हमें फर्नीचर और तकनीकी उत्पादों की आवश्यकता हो, तो हमें यह समझ में नहीं आता कि वे क्यों एक-दूसरे से अलग हो गए हैं। क्या उनके बीच कोई आपसी समझौता नहीं था? क्या यह केवल एक और मनी-मेकिंग स्कीम है?
इसके अलावा, वनप्लस ने पांच नए उपकरणों को पेश किया है। लेकिन क्या किसी को यह समझ में आता है कि क्या वे इन सभी उत्पादों को खरीदने के लिए मजबूर हैं? क्या यह केवल एक और उपभोक्तावाद की चाल है? हमें यह समझना होगा कि ये कंपनियाँ केवल मुनाफा कमाने के लिए खेल रही हैं, और हम सभी इस खेल में केवल मोहरे हैं।
अंत में, क्या हमें यह सोचने की जरूरत है कि हम किसके लिए अपने पैसे खर्च कर रहे हैं? क्या यह वास्तव में जरूरी है कि हम हर नए गैजेट का पीछा करें? हमें चाहिए कि हम इन कंपनियों के खिलाफ खड़े हों और उन्हें बताएं कि हम उनके बेतुके वादों को और नहीं सहन करेंगे।
#टेक्नोलॉजी #सैमसंग #आईओएस #वनप्लस #उपभोक्तावाद
सैमसंग ने त्रैफोल्ड फोन का जो वादा किया है, वह सिर्फ एक मार्केटिंग चाल है। क्या हमें यकीन दिलाने की जरूरत है कि यह नया डिज़ाइन वास्तव में काम करेगा? हर बार जब वे नए उत्पाद लाते हैं, हमें एक ही समस्या का सामना करना पड़ता है - क्या ये वास्तव में उपयोगी हैं या सिर्फ एक और फैंसी खिलौना? सैमसंग के नए फोन की पतली आकृति सिर्फ एक दिखावा है, असली सवाल यह है कि क्या यह रोजमर्रा की ज़िंदगी में हमारी मदद करेगा या नहीं?
और फिर आता है एप्पल का आईओएस 26, जिसने बीटा ड्रामा के साथ हमें फिर से निराश किया है। क्या हमें हर बार नए संस्करण के लिए बेवकूफ बनाना कोई शौक है? क्या यह कोई मजाक है कि हम हर बार बग्स और समस्याओं के साथ जूझते रहें? जब हमारे फोन का अपडेट हमारी ज़िंदगी को और जटिल बना दे, तो फिर यह तकनीक का क्या फायदा है?
आईकेया और सोनोस का विभाजन भी समझ से परे है। क्या ये कंपनियाँ हमें यह बताने का प्रयास कर रही हैं कि वे कितनी बेकार हो गई हैं? जब हमें फर्नीचर और तकनीकी उत्पादों की आवश्यकता हो, तो हमें यह समझ में नहीं आता कि वे क्यों एक-दूसरे से अलग हो गए हैं। क्या उनके बीच कोई आपसी समझौता नहीं था? क्या यह केवल एक और मनी-मेकिंग स्कीम है?
इसके अलावा, वनप्लस ने पांच नए उपकरणों को पेश किया है। लेकिन क्या किसी को यह समझ में आता है कि क्या वे इन सभी उत्पादों को खरीदने के लिए मजबूर हैं? क्या यह केवल एक और उपभोक्तावाद की चाल है? हमें यह समझना होगा कि ये कंपनियाँ केवल मुनाफा कमाने के लिए खेल रही हैं, और हम सभी इस खेल में केवल मोहरे हैं।
अंत में, क्या हमें यह सोचने की जरूरत है कि हम किसके लिए अपने पैसे खर्च कर रहे हैं? क्या यह वास्तव में जरूरी है कि हम हर नए गैजेट का पीछा करें? हमें चाहिए कि हम इन कंपनियों के खिलाफ खड़े हों और उन्हें बताएं कि हम उनके बेतुके वादों को और नहीं सहन करेंगे।
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क्या हम अब भी तकनीकी कंपनियों की बेवकूफियों को सहन करने को मजबूर हैं? इस हफ्ते की गियर न्यूज़ ने हमें फिर से झकझोर दिया है। सैमसंग की त्रैफोल्ड वादे से लेकर आईकेया और सोनोस के विभाजन तक, यह साफ है कि ये कंपनियाँ हमें केवल दिखावे के लिए बेवकूफ बना रही हैं।
सैमसंग ने त्रैफोल्ड फोन का जो वादा किया है, वह सिर्फ एक मार्केटिंग चाल है। क्या हमें यकीन दिलाने की जरूरत है कि यह नया डिज़ाइन वास्तव में काम करेगा? हर बार जब वे नए उत्पाद लाते हैं, हमें एक ही समस्या का सामना करना पड़ता है - क्या ये वास्तव में उपयोगी हैं या सिर्फ एक और फैंसी खिलौना? सैमसंग के नए फोन की पतली आकृति सिर्फ एक दिखावा है, असली सवाल यह है कि क्या यह रोजमर्रा की ज़िंदगी में हमारी मदद करेगा या नहीं?
और फिर आता है एप्पल का आईओएस 26, जिसने बीटा ड्रामा के साथ हमें फिर से निराश किया है। क्या हमें हर बार नए संस्करण के लिए बेवकूफ बनाना कोई शौक है? क्या यह कोई मजाक है कि हम हर बार बग्स और समस्याओं के साथ जूझते रहें? जब हमारे फोन का अपडेट हमारी ज़िंदगी को और जटिल बना दे, तो फिर यह तकनीक का क्या फायदा है?
आईकेया और सोनोस का विभाजन भी समझ से परे है। क्या ये कंपनियाँ हमें यह बताने का प्रयास कर रही हैं कि वे कितनी बेकार हो गई हैं? जब हमें फर्नीचर और तकनीकी उत्पादों की आवश्यकता हो, तो हमें यह समझ में नहीं आता कि वे क्यों एक-दूसरे से अलग हो गए हैं। क्या उनके बीच कोई आपसी समझौता नहीं था? क्या यह केवल एक और मनी-मेकिंग स्कीम है?
इसके अलावा, वनप्लस ने पांच नए उपकरणों को पेश किया है। लेकिन क्या किसी को यह समझ में आता है कि क्या वे इन सभी उत्पादों को खरीदने के लिए मजबूर हैं? क्या यह केवल एक और उपभोक्तावाद की चाल है? हमें यह समझना होगा कि ये कंपनियाँ केवल मुनाफा कमाने के लिए खेल रही हैं, और हम सभी इस खेल में केवल मोहरे हैं।
अंत में, क्या हमें यह सोचने की जरूरत है कि हम किसके लिए अपने पैसे खर्च कर रहे हैं? क्या यह वास्तव में जरूरी है कि हम हर नए गैजेट का पीछा करें? हमें चाहिए कि हम इन कंपनियों के खिलाफ खड़े हों और उन्हें बताएं कि हम उनके बेतुके वादों को और नहीं सहन करेंगे।
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