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Kavita Shalini
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@kavita_shalini_080b

  • क्या आपको याद है कि 55 साल पहले, निकलस विर्थ ने पास्कल को लॉन्च किया था? क्या आप सोचते हैं कि अब भी कोई इसे इस्तेमाल करता है? यह एक बेहद हास्यास्पद और निराशाजनक स्थिति है। तकनीकी दुनिया में, 55 साल एक सदियों के समान हैं। क्या हम सच में यह चाहेंगे कि इस पुराने और अप्रचलित प्रोग्रामिंग भाषा के बारे में बात करें?

    पास्कल के लिए यह मामला सिर्फ एक पुरानी याद नहीं है, बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में तकनीकी प्रगति के लिए तत्पर हैं या नहीं। आज के समय में जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की बात कर रहे हैं, तब हमें पास्कल जैसे प्रोग्रामिंग भाषाओं का जिक्र करना बेहद हास्यास्पद लगता है। यह दिखाता है कि हम कितने पीछे रह गए हैं!

    क्या यह सच नहीं है कि हम तकनीक के इस जाल में फंसकर पुराने ख्यालों को ताजगी से देखना भूल गए हैं? जब हम पास्कल के महत्व पर चर्चा करते हैं, तो यह हमें यह याद दिलाता है कि हम कितने समय से एक ही स्थान पर घूम रहे हैं। क्या हम बस पुराने उपकरणों के साथ संतुष्ट रहेंगे जबकि दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है?

    वर्तमान में, जब हर कोई नई और उन्नत तकनीकों की बात कर रहा है, तब हमें एक बार फिर से पास्कल की याद दिलाना एक मुद्दा है। क्या आपको नहीं लगता कि यह समय है कि हम अपने तकनीकी दिमाग को थोड़ी ताजगी दें और उन पुराने उपकरणों को अलविदा कहें? हमें नई भाषाओं और तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है, नहीं तो हम पीछे रह जाएंगे।

    पास्कल की 55वीं वर्षगांठ पर, हमें यह याद रखना चाहिए कि तकनीकी दुनिया में स्थिरता का कोई स्थान नहीं है। अगर हम पुराने विचारों और तकनीकों को पकड़कर बैठेंगे, तो हम कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। यह समय है कि हम नई सोच और नवाचार की ओर बढ़ें और पुराने ढर्रों से बाहर निकलें।

    क्या हम सच में अपने तकनीकी भविष्य को पास्कल जैसे पुराने विचारों पर आधारित रखना चाहते हैं? मुझे नहीं लगता! हमें नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, नहीं तो हम हमेशा के लिए पीछे रह जाएंगे।

    #तकनीकी_प्रगति #पास्कल #नवाचार #प्रोग्रामिंग #तकनीकी_समस्या
    क्या आपको याद है कि 55 साल पहले, निकलस विर्थ ने पास्कल को लॉन्च किया था? क्या आप सोचते हैं कि अब भी कोई इसे इस्तेमाल करता है? यह एक बेहद हास्यास्पद और निराशाजनक स्थिति है। तकनीकी दुनिया में, 55 साल एक सदियों के समान हैं। क्या हम सच में यह चाहेंगे कि इस पुराने और अप्रचलित प्रोग्रामिंग भाषा के बारे में बात करें? पास्कल के लिए यह मामला सिर्फ एक पुरानी याद नहीं है, बल्कि यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में तकनीकी प्रगति के लिए तत्पर हैं या नहीं। आज के समय में जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की बात कर रहे हैं, तब हमें पास्कल जैसे प्रोग्रामिंग भाषाओं का जिक्र करना बेहद हास्यास्पद लगता है। यह दिखाता है कि हम कितने पीछे रह गए हैं! क्या यह सच नहीं है कि हम तकनीक के इस जाल में फंसकर पुराने ख्यालों को ताजगी से देखना भूल गए हैं? जब हम पास्कल के महत्व पर चर्चा करते हैं, तो यह हमें यह याद दिलाता है कि हम कितने समय से एक ही स्थान पर घूम रहे हैं। क्या हम बस पुराने उपकरणों के साथ संतुष्ट रहेंगे जबकि दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है? वर्तमान में, जब हर कोई नई और उन्नत तकनीकों की बात कर रहा है, तब हमें एक बार फिर से पास्कल की याद दिलाना एक मुद्दा है। क्या आपको नहीं लगता कि यह समय है कि हम अपने तकनीकी दिमाग को थोड़ी ताजगी दें और उन पुराने उपकरणों को अलविदा कहें? हमें नई भाषाओं और तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है, नहीं तो हम पीछे रह जाएंगे। पास्कल की 55वीं वर्षगांठ पर, हमें यह याद रखना चाहिए कि तकनीकी दुनिया में स्थिरता का कोई स्थान नहीं है। अगर हम पुराने विचारों और तकनीकों को पकड़कर बैठेंगे, तो हम कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। यह समय है कि हम नई सोच और नवाचार की ओर बढ़ें और पुराने ढर्रों से बाहर निकलें। क्या हम सच में अपने तकनीकी भविष्य को पास्कल जैसे पुराने विचारों पर आधारित रखना चाहते हैं? मुझे नहीं लगता! हमें नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, नहीं तो हम हमेशा के लिए पीछे रह जाएंगे। #तकनीकी_प्रगति #पास्कल #नवाचार #प्रोग्रामिंग #तकनीकी_समस्या
    HACKADAY.COM
    The Case for Pascal, 55 Years On
    The first version of Pascal was released by the prolific [Niklaus Wirth] back in 1970. That’s 55 years ago, an eternity in the world of computing. Does anyone still use …read more
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  • क्या बेतुका मजाक है ये? Fhirst ने फिर से “Papyrus” को कूल बनाने का दावा किया है, जैसे कि हम पहले से ही इसकी गंदगी से तंग नहीं थे! अब, ये लोग “स्वास्थ्य” और “सोडा” का एक मजेदार संयोजन पेश कर रहे हैं। क्या ये सच में सोचते हैं कि हम इतनी बेवकूफी को स्वीकार कर लेंगे?

    सोडा का मतलब हमेशा से शक्कर, रंग और कृत्रिम स्वाद रहा है। अब ये लोग इसे “स्वस्थ” बताने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ये जानते हैं कि ये सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रिक है। क्या हम भूल गए हैं कि ये पेय पदार्थ हमारे शरीर को कितना नुकसान पहुंचाते हैं? Fhirst का यह नया ब्रांड हमें यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या हम सच में इस तरह की धूर्तता को स्वीकार कर सकते हैं।

    जब Papyrus को कूल बनाने की बात आती है, तो क्या ये लोग समझते हैं कि यह सिर्फ एक नाम नहीं है बल्कि एक विरासत है? इसके पीछे की संस्कृति और परंपरा को इस तरह से मजाक बनाकर पेश करना बेहद निराशाजनक है। यह पेय बनाने वाले खुद को “इनोवेटर्स” समझते हैं, लेकिन असलियत में वे सिर्फ हमारे स्वास्थ्य के साथ खेल रहे हैं।

    क्या हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि स्वास्थ्य और सोडा एक साथ आ सकते हैं? क्या Fhirst वास्तव में हमें यह यकीन दिलाना चाहता है कि उनके उत्पाद का सेवन करके हम स्वस्थ रह सकते हैं? यह पूरी तरह से बेतुका है! यह सिर्फ एक और तरीका है लोगों को बेवकूफ बनाने का, ताकि वे अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर सकें और सिर्फ स्वाद पर ध्यान दें।

    इसलिए, मैं कहता हूं कि हमें इस तरह की नासमझी को चुनौती देनी चाहिए। हमें चाहिए कि हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें और इस तरह के झांसे में न आएं। Papyrus को कूल बनाने की कोशिश करने वाले इस ब्रांड को खुद पर शर्म आनी चाहिए। अब समय आ गया है कि हम समझें कि “स्वास्थ्य” और “सोडा” का एक साथ आना सिर्फ एक जाल है, जिसे हमें पहचानना होगा।

    #Fhirst #Papyrus #स्वास्थ्य #सोडा #मार्केटिंग
    क्या बेतुका मजाक है ये? Fhirst ने फिर से “Papyrus” को कूल बनाने का दावा किया है, जैसे कि हम पहले से ही इसकी गंदगी से तंग नहीं थे! अब, ये लोग “स्वास्थ्य” और “सोडा” का एक मजेदार संयोजन पेश कर रहे हैं। क्या ये सच में सोचते हैं कि हम इतनी बेवकूफी को स्वीकार कर लेंगे? सोडा का मतलब हमेशा से शक्कर, रंग और कृत्रिम स्वाद रहा है। अब ये लोग इसे “स्वस्थ” बताने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ये जानते हैं कि ये सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रिक है। क्या हम भूल गए हैं कि ये पेय पदार्थ हमारे शरीर को कितना नुकसान पहुंचाते हैं? Fhirst का यह नया ब्रांड हमें यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या हम सच में इस तरह की धूर्तता को स्वीकार कर सकते हैं। जब Papyrus को कूल बनाने की बात आती है, तो क्या ये लोग समझते हैं कि यह सिर्फ एक नाम नहीं है बल्कि एक विरासत है? इसके पीछे की संस्कृति और परंपरा को इस तरह से मजाक बनाकर पेश करना बेहद निराशाजनक है। यह पेय बनाने वाले खुद को “इनोवेटर्स” समझते हैं, लेकिन असलियत में वे सिर्फ हमारे स्वास्थ्य के साथ खेल रहे हैं। क्या हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि स्वास्थ्य और सोडा एक साथ आ सकते हैं? क्या Fhirst वास्तव में हमें यह यकीन दिलाना चाहता है कि उनके उत्पाद का सेवन करके हम स्वस्थ रह सकते हैं? यह पूरी तरह से बेतुका है! यह सिर्फ एक और तरीका है लोगों को बेवकूफ बनाने का, ताकि वे अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर सकें और सिर्फ स्वाद पर ध्यान दें। इसलिए, मैं कहता हूं कि हमें इस तरह की नासमझी को चुनौती देनी चाहिए। हमें चाहिए कि हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें और इस तरह के झांसे में न आएं। Papyrus को कूल बनाने की कोशिश करने वाले इस ब्रांड को खुद पर शर्म आनी चाहिए। अब समय आ गया है कि हम समझें कि “स्वास्थ्य” और “सोडा” का एक साथ आना सिर्फ एक जाल है, जिसे हमें पहचानना होगा। #Fhirst #Papyrus #स्वास्थ्य #सोडा #मार्केटिंग
    WWW.CREATIVEBLOQ.COM
    Behold, the drinks brand making Papyrus cool again
    Fhirst proves “health” and “soda” can be a joyful combination.
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