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Prakash Chandan
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@prakash_chandan_fae7

  • SIGGRAPH 2025 का आयोजन वैंकूवर में हुआ, और हर बार की तरह, यह एक बड़ी धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। लेकिन क्या यह सच में एक सफलता है या फिर सिर्फ एक दिखावा? 12,400 लोगों की भीड़ और 84 देशों का प्रतिनिधित्व देखकर ऐसा लगता है कि सब कुछ सही चल रहा है, लेकिन यह सब एक बड़ी समस्या को छुपाने का केवल एक तरीका है।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात करें तो, क्या हम सच में इसे एक नई दिशा मान सकते हैं? क्या यह केवल एक हॉट टॉपिक है या वास्तव में हमारे समाज के लिए एक नई क्रांति? SIGGRAPH 2025 में AI को एक नए उत्साह के रूप में पेश किया गया, लेकिन क्या किसी ने यह सोचा कि यह उत्साह हमारे कामकाजी जीवन को किस हद तक प्रभावित करेगा? हम तकनीकी प्रगति की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या हम यह नहीं देख रहे हैं कि हमारे काम को किस तरह से मशीनों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है?

    यहाँ हम एक बहुत ही गंभीर सवाल पर बात कर रहे हैं - क्या हमें इस तरह के आयोजनों की जरूरत है, जहां हम केवल प्रदर्शन और दिखावे की बात करते हैं? क्या यह सही है कि हम AI को एक नई दिशा देने का दावा करते हुए, इसके नकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज कर दें? तकनीक को मानवता का साथी मानना सही है, लेकिन क्या हम यह नहीं भूल रहे हैं कि इसके गलत इस्तेमाल से हमारी सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंच सकता है?

    हमारे सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि तकनीकी प्रगति में एक सीमा होनी चाहिए। जब हम AI को इतना महत्वपूर्ण मानते हैं, तो हम यह भूल जाते हैं कि मानव कौशल और प्रतिभा को भी महत्व देना जरूरी है। SIGGRAPH 2025 में जो हुआ, वह एक बड़ी छलावा हो सकता है, और हमें इस पर विचार करना चाहिए कि हम किस दिशा में जा रहे हैं।

    हमें एक ठोस दृष्टिकोण की आवश्यकता है, न कि केवल उत्सवों और सम्मेलनों के माध्यम से दिखावे की। हमें तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवता के हितों को भी ध्यान में रखना चाहिए। अन्यथा, हम केवल एक चकाचौंध में जी रहे हैं, जहाँ असलियत कहीं खो गई है।

    #तकनीकी_प्रगति #आर्टिफिशियल_इंटेलिजेंस #SIGGRAPH2025 #समाज #नवीनता
    SIGGRAPH 2025 का आयोजन वैंकूवर में हुआ, और हर बार की तरह, यह एक बड़ी धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। लेकिन क्या यह सच में एक सफलता है या फिर सिर्फ एक दिखावा? 12,400 लोगों की भीड़ और 84 देशों का प्रतिनिधित्व देखकर ऐसा लगता है कि सब कुछ सही चल रहा है, लेकिन यह सब एक बड़ी समस्या को छुपाने का केवल एक तरीका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात करें तो, क्या हम सच में इसे एक नई दिशा मान सकते हैं? क्या यह केवल एक हॉट टॉपिक है या वास्तव में हमारे समाज के लिए एक नई क्रांति? SIGGRAPH 2025 में AI को एक नए उत्साह के रूप में पेश किया गया, लेकिन क्या किसी ने यह सोचा कि यह उत्साह हमारे कामकाजी जीवन को किस हद तक प्रभावित करेगा? हम तकनीकी प्रगति की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या हम यह नहीं देख रहे हैं कि हमारे काम को किस तरह से मशीनों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है? यहाँ हम एक बहुत ही गंभीर सवाल पर बात कर रहे हैं - क्या हमें इस तरह के आयोजनों की जरूरत है, जहां हम केवल प्रदर्शन और दिखावे की बात करते हैं? क्या यह सही है कि हम AI को एक नई दिशा देने का दावा करते हुए, इसके नकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज कर दें? तकनीक को मानवता का साथी मानना सही है, लेकिन क्या हम यह नहीं भूल रहे हैं कि इसके गलत इस्तेमाल से हमारी सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंच सकता है? हमारे सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि तकनीकी प्रगति में एक सीमा होनी चाहिए। जब हम AI को इतना महत्वपूर्ण मानते हैं, तो हम यह भूल जाते हैं कि मानव कौशल और प्रतिभा को भी महत्व देना जरूरी है। SIGGRAPH 2025 में जो हुआ, वह एक बड़ी छलावा हो सकता है, और हमें इस पर विचार करना चाहिए कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। हमें एक ठोस दृष्टिकोण की आवश्यकता है, न कि केवल उत्सवों और सम्मेलनों के माध्यम से दिखावे की। हमें तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवता के हितों को भी ध्यान में रखना चाहिए। अन्यथा, हम केवल एक चकाचौंध में जी रहे हैं, जहाँ असलियत कहीं खो गई है। #तकनीकी_प्रगति #आर्टिफिशियल_इंटेलिजेंस #SIGGRAPH2025 #समाज #नवीनता
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