आजकल चाँद पर इंसानी स्थायी बस्तियों की कोशिशें चल रही हैं। NASA का आर्टेमिस प्रोग्राम इस दिशा में एक बड़ा प्रोजेक्ट है। लेकिन सच कहूं तो, ये सब सुनकर अच्छा नहीं लगता। चाँद पर 3डी प्रिंटिंग के बारे में भी बातें हो रही हैं, खासकर रेगोलिथ से। ये सब बहुत ही जटिल और थकाऊ लग रहा है।
किसी ने सोचा है कि चाँद पर बस्ती बनाना कितना मुश्किल होगा? वहाँ का माहौल, विकिरण, और फिर ये रेगोलिथ। मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि क्या हम सच में वहाँ रह पाएंगे? सब कुछ कितना ज्यादा तकनीकी है। 3डी प्रिंटिंग की बातें सुनते-सुनते मुझे बस यही लगता है कि ये सब बातें हैं, लेकिन असली काम करने में इतना कष्ट क्यों उठाना?
हर कोई चाँद पर जाने की बात करता है, लेकिन क्या वाकई वहाँ रहने का मतलब है? क्या हम वहाँ के जीवन को आसान बना पाने में सक्षम होंगे? हमारे पास इतनी तकनीक है, लेकिन क्या यह सब बस बातें हैं? क्या हमें सच में चाँद की ज़रूरत है?
जब भी मैं ये सब पढ़ता हूँ, मुझे तो बस यही लगता है कि चलो, और कुछ कर लेते हैं। फिर से यहाँ धरती पर ही रहना और आराम से जीना। चाँद की परियोजनाएँ इतनी पेचीदा हैं कि मुझे समझ ही नहीं आता कि सब लोग इतना उत्साहित क्यों हैं।
तो, ये चलो देख लेते हैं कि क्या होता है। शायद कुछ सालों में हमें चाँद पर बने घरों के बारे में और जानने को मिले। लेकिन फिलहाल, मुझे तो इस सब में कोई खास दिलचस्पी नहीं है।
#चाँद #NASA #3डीप्रिंटिंग #आर्टेमिस #रेगोलिथ
किसी ने सोचा है कि चाँद पर बस्ती बनाना कितना मुश्किल होगा? वहाँ का माहौल, विकिरण, और फिर ये रेगोलिथ। मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि क्या हम सच में वहाँ रह पाएंगे? सब कुछ कितना ज्यादा तकनीकी है। 3डी प्रिंटिंग की बातें सुनते-सुनते मुझे बस यही लगता है कि ये सब बातें हैं, लेकिन असली काम करने में इतना कष्ट क्यों उठाना?
हर कोई चाँद पर जाने की बात करता है, लेकिन क्या वाकई वहाँ रहने का मतलब है? क्या हम वहाँ के जीवन को आसान बना पाने में सक्षम होंगे? हमारे पास इतनी तकनीक है, लेकिन क्या यह सब बस बातें हैं? क्या हमें सच में चाँद की ज़रूरत है?
जब भी मैं ये सब पढ़ता हूँ, मुझे तो बस यही लगता है कि चलो, और कुछ कर लेते हैं। फिर से यहाँ धरती पर ही रहना और आराम से जीना। चाँद की परियोजनाएँ इतनी पेचीदा हैं कि मुझे समझ ही नहीं आता कि सब लोग इतना उत्साहित क्यों हैं।
तो, ये चलो देख लेते हैं कि क्या होता है। शायद कुछ सालों में हमें चाँद पर बने घरों के बारे में और जानने को मिले। लेकिन फिलहाल, मुझे तो इस सब में कोई खास दिलचस्पी नहीं है।
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आजकल चाँद पर इंसानी स्थायी बस्तियों की कोशिशें चल रही हैं। NASA का आर्टेमिस प्रोग्राम इस दिशा में एक बड़ा प्रोजेक्ट है। लेकिन सच कहूं तो, ये सब सुनकर अच्छा नहीं लगता। चाँद पर 3डी प्रिंटिंग के बारे में भी बातें हो रही हैं, खासकर रेगोलिथ से। ये सब बहुत ही जटिल और थकाऊ लग रहा है।
किसी ने सोचा है कि चाँद पर बस्ती बनाना कितना मुश्किल होगा? वहाँ का माहौल, विकिरण, और फिर ये रेगोलिथ। मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि क्या हम सच में वहाँ रह पाएंगे? सब कुछ कितना ज्यादा तकनीकी है। 3डी प्रिंटिंग की बातें सुनते-सुनते मुझे बस यही लगता है कि ये सब बातें हैं, लेकिन असली काम करने में इतना कष्ट क्यों उठाना?
हर कोई चाँद पर जाने की बात करता है, लेकिन क्या वाकई वहाँ रहने का मतलब है? क्या हम वहाँ के जीवन को आसान बना पाने में सक्षम होंगे? हमारे पास इतनी तकनीक है, लेकिन क्या यह सब बस बातें हैं? क्या हमें सच में चाँद की ज़रूरत है?
जब भी मैं ये सब पढ़ता हूँ, मुझे तो बस यही लगता है कि चलो, और कुछ कर लेते हैं। फिर से यहाँ धरती पर ही रहना और आराम से जीना। चाँद की परियोजनाएँ इतनी पेचीदा हैं कि मुझे समझ ही नहीं आता कि सब लोग इतना उत्साहित क्यों हैं।
तो, ये चलो देख लेते हैं कि क्या होता है। शायद कुछ सालों में हमें चाँद पर बने घरों के बारे में और जानने को मिले। लेकिन फिलहाल, मुझे तो इस सब में कोई खास दिलचस्पी नहीं है।
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