जीवन कभी-कभी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है, जहाँ हमें अपने ही सपनों से धोखा मिल जाता है। जब मैंने सुना कि एनेसी फेस्टिवल ने MIFA के 40 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक एनीमेशन तैयार किया है, तो मेरे दिल में एक अजीब सा दर्द उठ गया। 🎭
चार दशकों की मेहनत, कला और समर्पण का जश्न मनाने के लिए आयोजित इस फेस्टिवल में, हर किसी को एक नई उम्मीद, एक नया सपना देखने का मौका मिलता है। लेकिन मेरे लिए, यह सिर्फ एक और याद दिलाने वाला क्षण था कि मैं अकेला हूँ। चारों ओर लोग हैं, हंसते हुए, बातें करते हुए, लेकिन मैं… मैं तो बस एक सन्नाटे में खो गया हूँ। 😔
MIFA के इस अद्भुत सफर का हिस्सा बनने की ख्वाहिश में, मैंने भी अपने सपनों को जीने की कोशिश की। मैंने सोचा था कि मैं भी एक दिन अपनी कला को इस मंच पर प्रस्तुत कर सकूंगा। लेकिन अब, जब मैं इस उत्सव के बारे में सोचता हूँ, मुझे अपने असफल प्रयासों का एक भारी बोझ महसूस होता है। क्या मैं कभी इस मंच तक पहुँच पाऊंगा? क्या कोई मेरी कला को समझेगा? क्या मैं कभी भी अपनी आवाज़ को इस विशाल समुद्र में खोज पाऊंगा? 🌊
इस एनीमेशन के पीछे की कहानी सुनते हुए, मुझे याद आता है कि कितनी बार मैंने अपने भीतर के कलाकार को पहचानने की कोशिश की, लेकिन हर बार मुझे सिर्फ अंधेरा ही मिला। ये एक ऐसा अनुभव है, जहाँ मैं अपनी मेहनत के बावजूद खुद को खोया हुआ सा महसूस करता हूँ। क्या किसी और ने भी ऐसा महसूस किया है? क्या आप भी कभी ऐसे पल में रहे हैं जहाँ सब कुछ सही होते हुए भी, आप खुद को अकेला महसूस करते हैं? 💔
मैं जानता हूँ कि कला एक यात्रा है, लेकिन जब आप रास्ते में ही खो जाते हैं, तो यह यात्रा कितनी कठिन हो जाती है। MIFA के इस 40 वर्षों के समारोह में, मैं सिर्फ एक दर्शक बनकर रह गया हूँ, अपनी ही खामोशियों में। शायद यही मेरी कहानी है, एक अधूरी कहानी, जो कभी पूरी नहीं होगी।
#MIFA #एनीमेशन #एनेसीफेस्टिवल #अकेलापन #सपने
चार दशकों की मेहनत, कला और समर्पण का जश्न मनाने के लिए आयोजित इस फेस्टिवल में, हर किसी को एक नई उम्मीद, एक नया सपना देखने का मौका मिलता है। लेकिन मेरे लिए, यह सिर्फ एक और याद दिलाने वाला क्षण था कि मैं अकेला हूँ। चारों ओर लोग हैं, हंसते हुए, बातें करते हुए, लेकिन मैं… मैं तो बस एक सन्नाटे में खो गया हूँ। 😔
MIFA के इस अद्भुत सफर का हिस्सा बनने की ख्वाहिश में, मैंने भी अपने सपनों को जीने की कोशिश की। मैंने सोचा था कि मैं भी एक दिन अपनी कला को इस मंच पर प्रस्तुत कर सकूंगा। लेकिन अब, जब मैं इस उत्सव के बारे में सोचता हूँ, मुझे अपने असफल प्रयासों का एक भारी बोझ महसूस होता है। क्या मैं कभी इस मंच तक पहुँच पाऊंगा? क्या कोई मेरी कला को समझेगा? क्या मैं कभी भी अपनी आवाज़ को इस विशाल समुद्र में खोज पाऊंगा? 🌊
इस एनीमेशन के पीछे की कहानी सुनते हुए, मुझे याद आता है कि कितनी बार मैंने अपने भीतर के कलाकार को पहचानने की कोशिश की, लेकिन हर बार मुझे सिर्फ अंधेरा ही मिला। ये एक ऐसा अनुभव है, जहाँ मैं अपनी मेहनत के बावजूद खुद को खोया हुआ सा महसूस करता हूँ। क्या किसी और ने भी ऐसा महसूस किया है? क्या आप भी कभी ऐसे पल में रहे हैं जहाँ सब कुछ सही होते हुए भी, आप खुद को अकेला महसूस करते हैं? 💔
मैं जानता हूँ कि कला एक यात्रा है, लेकिन जब आप रास्ते में ही खो जाते हैं, तो यह यात्रा कितनी कठिन हो जाती है। MIFA के इस 40 वर्षों के समारोह में, मैं सिर्फ एक दर्शक बनकर रह गया हूँ, अपनी ही खामोशियों में। शायद यही मेरी कहानी है, एक अधूरी कहानी, जो कभी पूरी नहीं होगी।
#MIFA #एनीमेशन #एनेसीफेस्टिवल #अकेलापन #सपने
जीवन कभी-कभी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है, जहाँ हमें अपने ही सपनों से धोखा मिल जाता है। जब मैंने सुना कि एनेसी फेस्टिवल ने MIFA के 40 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए एक एनीमेशन तैयार किया है, तो मेरे दिल में एक अजीब सा दर्द उठ गया। 🎭
चार दशकों की मेहनत, कला और समर्पण का जश्न मनाने के लिए आयोजित इस फेस्टिवल में, हर किसी को एक नई उम्मीद, एक नया सपना देखने का मौका मिलता है। लेकिन मेरे लिए, यह सिर्फ एक और याद दिलाने वाला क्षण था कि मैं अकेला हूँ। चारों ओर लोग हैं, हंसते हुए, बातें करते हुए, लेकिन मैं… मैं तो बस एक सन्नाटे में खो गया हूँ। 😔
MIFA के इस अद्भुत सफर का हिस्सा बनने की ख्वाहिश में, मैंने भी अपने सपनों को जीने की कोशिश की। मैंने सोचा था कि मैं भी एक दिन अपनी कला को इस मंच पर प्रस्तुत कर सकूंगा। लेकिन अब, जब मैं इस उत्सव के बारे में सोचता हूँ, मुझे अपने असफल प्रयासों का एक भारी बोझ महसूस होता है। क्या मैं कभी इस मंच तक पहुँच पाऊंगा? क्या कोई मेरी कला को समझेगा? क्या मैं कभी भी अपनी आवाज़ को इस विशाल समुद्र में खोज पाऊंगा? 🌊
इस एनीमेशन के पीछे की कहानी सुनते हुए, मुझे याद आता है कि कितनी बार मैंने अपने भीतर के कलाकार को पहचानने की कोशिश की, लेकिन हर बार मुझे सिर्फ अंधेरा ही मिला। ये एक ऐसा अनुभव है, जहाँ मैं अपनी मेहनत के बावजूद खुद को खोया हुआ सा महसूस करता हूँ। क्या किसी और ने भी ऐसा महसूस किया है? क्या आप भी कभी ऐसे पल में रहे हैं जहाँ सब कुछ सही होते हुए भी, आप खुद को अकेला महसूस करते हैं? 💔
मैं जानता हूँ कि कला एक यात्रा है, लेकिन जब आप रास्ते में ही खो जाते हैं, तो यह यात्रा कितनी कठिन हो जाती है। MIFA के इस 40 वर्षों के समारोह में, मैं सिर्फ एक दर्शक बनकर रह गया हूँ, अपनी ही खामोशियों में। शायद यही मेरी कहानी है, एक अधूरी कहानी, जो कभी पूरी नहीं होगी।
#MIFA #एनीमेशन #एनेसीफेस्टिवल #अकेलापन #सपने
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