शिक्षा के क्षेत्र में जो हो रहा है, वह वाकई शर्मनाक है! 2025 One Hertz Challenge के नाम पर जो कुछ चल रहा है, वह केवल एक बड़ी धोखाधड़ी साबित हो रहा है। ये fancy digital handheld devices, जैसे कि Smart Response PE, जिनका उपयोग classrooms में किया जा रहा है, क्या केवल 10 stopwatch में तब्दील नहीं हो गए हैं? क्या ये सिर्फ़ तकनीकी खिलौने हैं या वाकई में ये छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं?
कितनी हास्यास्पद बात है कि हम एक ऐसे युग में रह रहे हैं जहाँ तकनीक हमारे बच्चों के ज्ञान को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी को और भी जटिल बनाने के लिए प्रयोग की जा रही है। ये fancy gadgets केवल दिखावे के लिए हैं, जब असली जरूरत है शिक्षकों को सही तरीके से शिक्षित करने की, ताकि वे छात्रों को सही दिशा में मार्गदर्शन कर सकें।
क्या आपने कभी सोचा है कि ये devices छात्रों की सोचने की क्षमता को कैसे प्रभावित कर रहे हैं? जब बच्चे सिर्फ़ बटन दबाने के लिए प्रशिक्षित होते हैं, तो क्या वे वास्तव में सीख रहे हैं? क्या ये केवल एक खेल बन गया है, जहाँ सही उत्तर देने पर छात्रों को अंक मिलते हैं, जबकि असली ज्ञान और समझ का कहीं कोई स्थान नहीं है?
और फिर बात आती है लागत की! क्या हम सच में सोचते हैं कि ये महंगे उपकरण शिक्षा के लिए एक निवेश हैं? यह सिर्फ़ पैसे की बर्बादी है। स्कूलों को सही संसाधनों की जरूरत है, न कि इन बेकार की चीज़ों की। शिक्षकों को अपने पाठ्यक्रम को बेहतर बनाने और छात्रों को सोचने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है, न कि उन्हें stopwatch की तरह बटन दबाने के लिए मजबूर करने की।
ये सब देखकर समझ में आता है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की कितनी ज़रूरत है। अगर हम इसी तरह चलते रहे, तो आने वाली पीढ़ी केवल तकनीकी खिलौनों के बीच फंसी रहेगी, जबकि असली ज्ञान और समझ उन्हें दूर होती जाएगी। हमें इस स्थिति को बदलने की जरूरत है, इसलिए हम सबको मिलकर आवाज उठानी होगी।
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#तकनीकी
#समाज
#ज्ञान
#विकास
शिक्षा के क्षेत्र में जो हो रहा है, वह वाकई शर्मनाक है! 2025 One Hertz Challenge के नाम पर जो कुछ चल रहा है, वह केवल एक बड़ी धोखाधड़ी साबित हो रहा है। ये fancy digital handheld devices, जैसे कि Smart Response PE, जिनका उपयोग classrooms में किया जा रहा है, क्या केवल 10 stopwatch में तब्दील नहीं हो गए हैं? क्या ये सिर्फ़ तकनीकी खिलौने हैं या वाकई में ये छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं?
कितनी हास्यास्पद बात है कि हम एक ऐसे युग में रह रहे हैं जहाँ तकनीक हमारे बच्चों के ज्ञान को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी को और भी जटिल बनाने के लिए प्रयोग की जा रही है। ये fancy gadgets केवल दिखावे के लिए हैं, जब असली जरूरत है शिक्षकों को सही तरीके से शिक्षित करने की, ताकि वे छात्रों को सही दिशा में मार्गदर्शन कर सकें।
क्या आपने कभी सोचा है कि ये devices छात्रों की सोचने की क्षमता को कैसे प्रभावित कर रहे हैं? जब बच्चे सिर्फ़ बटन दबाने के लिए प्रशिक्षित होते हैं, तो क्या वे वास्तव में सीख रहे हैं? क्या ये केवल एक खेल बन गया है, जहाँ सही उत्तर देने पर छात्रों को अंक मिलते हैं, जबकि असली ज्ञान और समझ का कहीं कोई स्थान नहीं है?
और फिर बात आती है लागत की! क्या हम सच में सोचते हैं कि ये महंगे उपकरण शिक्षा के लिए एक निवेश हैं? यह सिर्फ़ पैसे की बर्बादी है। स्कूलों को सही संसाधनों की जरूरत है, न कि इन बेकार की चीज़ों की। शिक्षकों को अपने पाठ्यक्रम को बेहतर बनाने और छात्रों को सोचने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है, न कि उन्हें stopwatch की तरह बटन दबाने के लिए मजबूर करने की।
ये सब देखकर समझ में आता है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की कितनी ज़रूरत है। अगर हम इसी तरह चलते रहे, तो आने वाली पीढ़ी केवल तकनीकी खिलौनों के बीच फंसी रहेगी, जबकि असली ज्ञान और समझ उन्हें दूर होती जाएगी। हमें इस स्थिति को बदलने की जरूरत है, इसलिए हम सबको मिलकर आवाज उठानी होगी।
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