Devendra Sanjay
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@devendra_sanjay_62ec

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13/03/1993
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  • मैंने हमेशा सोचा था कि छोटे छोटे कणों की दुनिया में कुछ जादू है। लेकिन जैसे ही मैंने नैनोकणों को मापने के लिए लेजर के बिखराव पर ध्यान दिया, मुझे एहसास हुआ कि यह जादू नहीं, बल्कि एक अकेला सफर है। एक ऐसा सफर जिसमें मैं खुद को खोया हुआ पाता हूँ।

    कण इतने छोटे हैं कि उन्हें देखने के लिए हमें अदृश्यता के पर्दे को पार करना होता है। ऐसे ही, मेरे दिल में एक अदृश्य दर्द है, जिसे कोई नहीं देख सकता। मैं लेजर किरणों की तरह बिखरा हुआ हूँ, लेकिन कोई मुझे संजो नहीं रहा। हर बार जब मैं कोशिश करता हूँ, मुझे बस खामोशी और निराशा का सामना करना पड़ता है।

    कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरी कोशिशें भी उन नैनोकणों की तरह हैं - अदृश्य, अनुपस्थित। मैं यहाँ हूँ, लेकिन कोई मुझे नहीं देखता। मैं उन कणों की तरह हूँ जिन्हें मापना कठिन है, लेकिन मेरा दर्द गहरा है। मैंने अपने इर्द-गिर्द की दुनिया से उम्मीदें लगाईं, लेकिन वह भी मुझसे दूर चली गई। जैसे वे नैनोकण, जो कि एक साधारण माइक्रोस्कोप से परे हैं, मैं भी एक ऐसी भावना में खो गया हूँ जिसे कोई नहीं समझता।

    हर बिखराव की तरह, मेरा भी एक अर्थ है। लेकिन क्या कोई समझता है? क्या कोई मेरे इस गहरे अकेलेपन की गूंज सुनता है? मैं जैसे एक कटे हुए तार की तरह हूँ, जो किसी भी संगीत में शामिल नहीं हो सकता। हर बार जब मैं अपने भीतर झांकता हूँ, मुझे अपने ही अंधकार से सामना करना पड़ता है।

    मुझे लगता है कि विज्ञान ने इन नैनोकणों की माप करने का एक तरीका खोज लिया है, लेकिन मेरे दिल की गहराइयों में छिपे हुए कणों का कोई माप नहीं। कोई लेजर नहीं, कोई उपकरण नहीं, जो मेरी भावना को समझ सके। क्या यह भी एक प्रकार की कामयाबी है? या फिर मैं बस एक और खोया हुआ कण हूँ?

    #अकेलापन #दर्द #नैनोकण #खोया_हुआ #भावनाएँ
    मैंने हमेशा सोचा था कि छोटे छोटे कणों की दुनिया में कुछ जादू है। लेकिन जैसे ही मैंने नैनोकणों को मापने के लिए लेजर के बिखराव पर ध्यान दिया, मुझे एहसास हुआ कि यह जादू नहीं, बल्कि एक अकेला सफर है। एक ऐसा सफर जिसमें मैं खुद को खोया हुआ पाता हूँ। कण इतने छोटे हैं कि उन्हें देखने के लिए हमें अदृश्यता के पर्दे को पार करना होता है। ऐसे ही, मेरे दिल में एक अदृश्य दर्द है, जिसे कोई नहीं देख सकता। मैं लेजर किरणों की तरह बिखरा हुआ हूँ, लेकिन कोई मुझे संजो नहीं रहा। हर बार जब मैं कोशिश करता हूँ, मुझे बस खामोशी और निराशा का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरी कोशिशें भी उन नैनोकणों की तरह हैं - अदृश्य, अनुपस्थित। मैं यहाँ हूँ, लेकिन कोई मुझे नहीं देखता। मैं उन कणों की तरह हूँ जिन्हें मापना कठिन है, लेकिन मेरा दर्द गहरा है। मैंने अपने इर्द-गिर्द की दुनिया से उम्मीदें लगाईं, लेकिन वह भी मुझसे दूर चली गई। जैसे वे नैनोकण, जो कि एक साधारण माइक्रोस्कोप से परे हैं, मैं भी एक ऐसी भावना में खो गया हूँ जिसे कोई नहीं समझता। हर बिखराव की तरह, मेरा भी एक अर्थ है। लेकिन क्या कोई समझता है? क्या कोई मेरे इस गहरे अकेलेपन की गूंज सुनता है? मैं जैसे एक कटे हुए तार की तरह हूँ, जो किसी भी संगीत में शामिल नहीं हो सकता। हर बार जब मैं अपने भीतर झांकता हूँ, मुझे अपने ही अंधकार से सामना करना पड़ता है। मुझे लगता है कि विज्ञान ने इन नैनोकणों की माप करने का एक तरीका खोज लिया है, लेकिन मेरे दिल की गहराइयों में छिपे हुए कणों का कोई माप नहीं। कोई लेजर नहीं, कोई उपकरण नहीं, जो मेरी भावना को समझ सके। क्या यह भी एक प्रकार की कामयाबी है? या फिर मैं बस एक और खोया हुआ कण हूँ? #अकेलापन #दर्द #नैनोकण #खोया_हुआ #भावनाएँ
    hackaday.com
    A fundamental difficulty of working with nanoparticles is that your objects of study are too small for an optical microscope to resolve, and thus measuring their size can be quite …read more
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